Love Story Short/short Story

आज न जाने क्यों मुझे किसी की आहट सुनाई दे रही है, न जाने क्यों मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा है मेरे दिल दिल पे आज कोई कन्ट्रोल ही नहीं है , क्यों आज मई मुस्कुराये जा रहा हु , 
ये सब आज जो मेरे साथ हो रहा है मेरे दोस्तों का कहना है की मुझे प्यार हो गया है , क्या सचमे मुझे प्यार हो है , ये सब कुछ जो मेरे साथ हो रहा है मुझे भी यही लगता है की शायद मुझे प्यार हो गया है।  

बात तब की है जब मै आज से एक साल पहले अपने किसी रिस्तेदार की शादी में शमल होने गया था। 
उस वक़्त मई सचमे वहां नहीं जाना चाहता था , लेकिन मेरी माँ के ज़बरदस्ती करने पे वहां जाने को मजबूर हो गया। मै जब वहां गया तो नार्मल ही था कोई उच्छुक नहीं था के शादी  में आया हु तो मज़े करूँगा। 
ऐसा कुछ भी नहीं सोच रहा था । मेरे चेहरे पे मुस्कान तो तब बिखर गई जब मैंने उसे देखा। मैं ऐसे ही कुर्सी पे बैठे हलकी गरम चाय की चुस्कियां भर रहा था और अपने बुवा की बातें सुन कर हामी भर रहा था। 
तभी अचनाक मेरी नज़र दरवाज़े की ओर गई और मैंने उसे देखा , जैसे ही मेरी नज़र उसपे पड़ी मनो मै  एक दम सा संन्न रह गया और अंदर से झूम उठा। 
आज से पहले मैंने ऐसी खूबसूरती ,इतनी चंचल , लड़की नहीं देखि थी , वो घर के आँगन में कुछ बच्चो के साथ खेल रही थी , उसे देख क्र ऐसा लग रहा था जैसे किसी हूर को आसमान से ज़मीं पर भेजा गया हो। 

मई एक दम से वहां से उठा और गेट के पास जाकर खड़े होक उसे ताड़ने लगा। और मन ही मन ये सोचने लगा के अच्छा हुआ के मेरी माँ ने मझे ज़बरदस्ती यहाँ भेजा , अगर आज मै यहाँ नहीं आता तो मै इतना अच्छा अवसर गवां देता। मई ये सब कुछ सोच ही रहा था की वो मेरी सामने आई और मुझसे बोल , 
तुम कितने बदल गए हो ,और पहले से काफी हैंडसम भी लगने लगे हो। 
ये सुनकर तो मनो मई अंदर से उछलने लगा ,ओह मतलब बात बन जाएगी , सेटिंग हो जाएगी लगता है। 
ये सब कुछ सोच के मुस्कुराए जा रहा था मै। फिर वो बोली हेलो! कहाँ ध्यान है तुम्हारा माँ तुमसे कुछ पूछ रही हु न , फिर मैंने बोला , है पूछो क्या हुआ।  फिर वो बोली कहा थे इतने दिनों से ? मैं उसकी और एक टक से देखे जा रहा था , मैंने उसको बोला क्या हम एक दूसरे को जानते हैं ? 
ये बोल क्र मैं उसकी आँखों के गहराईयों में खोने लगा मनो जैसे उसकी आँखें मुझसे कुछ बयां करना चाहती हो। 
नीली आँखें , गुलाबी होठ , प्यारा सा चेहरा , एक सच्चाई झलक रही थी उसकी आँखों में। 
मानों कबसे मेरा वेट कर रही हो। 
मैंने उसको बोलै तुम मुझे कैसे जानती हो ?
उसने छोटी सी मुस्कान देते हुए कहा की मुझे तुम नहीं जानते , बुद्धू मई समीरा हु। 
पागल मुझे तुम भूल ही गए न। 
जब उसने ये कहा तो चौक गया के क्या ये वही लड़की है जिसको आजसे पांच साल पहले मैंने ठुकरा दिया था ,
ये वही है जिसने मुझे अपने दिल की फीलिंग्स को मुझे इज़हार किया था। 


To be continue....................


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